लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी बढ़ने वाली है। नये वर्ष के अप्रैल माह में खाली हो रही राज्य सभा की दस सीटों के लिए यहां चुनाव होना है। साथ ही फूलपुर और गोरखपुर की रिक्त लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश की सहकारी समितियों के लिए भी राज्य सरकार जल्द ही चुनाव कराने का मन बना रही है।

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बीते साल उत्तर प्रदेश चुनावी मोड में रहा। साल की शुरुआत में ही विधानसभा के चुनाव हुए और 19 मार्च को नई सरकार ने सत्ता संभाली। इसके बाद ही पूरे प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मी बढ़ गयी। निकायों के चुनाव यद्यपि नवम्बर में हुए और नतीजे पहली दिसम्बर को आये लेकिन इसके लिए तैयारियां विधानसभा चुनाव के बाद ही शुरू हो गईं थी। अब नया साल प्रारम्भ होते ही प्रदेश एक बार फिर चुनावी मोड में आने वाला है। दरअसल प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी। हालांकि, इनमें से एक बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहले ही इस्तीफा देकर अपनी सीट रिक्त कर दी है। मायावती के अलावा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गये सपा के किरनमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश चंद्र अग्रवाल, जया बच्चन, चौधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी तथा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, भाजपा के विनय कटियार और बसपा के मुनकाद अली का कार्यकाल दो अप्रैल को पूरा हो जाएगा।

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इसके बाद निर्वाचन आयोग इन दस सीटों के लिए चुनाव करवायेगा। वैसे राज्य सभा के इस चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मी शीघ्र ही बढ़ने वाली है। विधान सभा में इस समय भाजपा के पास सहयोगी दलों को मिलाकर 325 की संख्या है। विपक्षियों में सपा के 47, बसपा के 19 और कांग्रेस के मात्र सात विधायक हैं। राज्य सभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी दल को करीब 40 विधायकों के मतों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अधिकतर सदस्य भाजपा के ही जीतेंगे। सपा भी अपना एक सांसद राज्य सभा में भेज सकती है। चूंकि भाजपा के कम से कम आठ सांसद राज्य सभा के लिए चुने जाने हैं। ऐसे में इस दल को अपने उम्मीदवार तय करने में काफी मंथन करना पड़ेगा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जो इस समय किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और खाली बैठे हैं, उन सब की निगाहें राज्य सभा के इस चुनाव पर लगी हुई हैं।

वैसे, उत्तर प्रदेश की राज्य सभा की एक सीट पर इस समय चुनाव हो रहा है। यह सीट गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे के बाद से खाली है। हालांकि भाजपा ने इसके लिए केंद्रीय राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर की संसदीय सीटों पर भी उपचुनाव होना है। लोक सभा की ये दोनों सीटें क्रमशः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई हैं। निर्वाचन आयोग इन दोनों सीटों पर उप चुनाव के लिए कभी भी अधिसूचना जारी कर सकता है।  इसके अलावा प्रदेश में सहकारी समितियों के भी चुनाव जल्द ही होंगे। ये चुनाव अक्टूबर 2017 में ही होने थे, लेकिन नगरीय निकाय चुनावों के चलते इन्हें टाल दिया गया। दरअसल, सहकारी समितियों के पिछले चुनाव अक्टूबर 2012 से जनवरी 2013 के बीच हुए थे। चुने गए प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच समाप्त हो रहा है। 

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