रांची। झारखंड में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। विधान सभा के अंदर और बाहर विपक्ष ने हाल में अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है। झारखंड में विपक्षी दलों को एकजुट करने में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बड़ी भूमिका रही है। चारा घोटाले के विभिन्न मामलों में अपने रांची प्रवास के दौरान लालू ने इसके लिये कड़ी मेहनत की थी। अभी भी वह जेल से विपक्ष की एकता को मजबूत करने में लगे हुये हैं।

इस बीच विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिये पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद यादव झारखंड के दौरे पर थे। इस दौरे के दौरान शरद ने झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के साथ जेल में लालू से मुलाकात की थी। विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिये शरद यादव ने झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन सहित अन्य दलों के नेताओं से भी बातचीत की थी।

दरअसल, लालू के जेल जाने के बाद साझा विरासत बचाओ अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा शरद यादव ने उठाया है। झारखंड का उनका यह दौरा इसी सिलसिले में था। झारखंड में अगले साल लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव होने हैं। इससे पहले शरद झारखंड में विपक्षी दलों का एक मजबूत गठबंधन बनाना चाहते हैं।

झारखंड की विपक्षी पार्टियां भी इसके पक्ष में हैं। कई मौकों पर ये अपनी एकजुटता प्रदर्शित भी कर चुकी हैं। लेकिन आगामी लोकसभा और विधान सभा चुनावों से पहले विपक्ष की एकता की परीक्षा इस साल झारखंड से राज्य सभा की दो सीटों के लिये होने वाले चुनाव में होगी। राज्य की राज्य सभा की दो सीट तीन मई को खाली हो रही है। ये दोनों सीट अभी विपक्ष के पास है। राज्यसभा के लिये 2012 में हुये चुनाव में इन सीटों पर कांग्रेस के प्रदीप कुमार बलमुचु और झामुमो के संजीव कुमार जीते थे। इन दोनों सीटों पर भाजपा की नजर है ।

झारखंड विधान सभा का जो मौजूदा गणित है उस हिसाब से एक-एक सीट सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिल सकती है। लेकिन सत्ता पक्ष की पूरी कोशिश इस बार भी दोनों सीटें कब्जाने की होगी । भाजपा 2016 के राज्य सभा चुनाव में दो उम्मीदवार उतार कर दोनों सीटें जीत चुकी है। विपक्ष का प्रयास होगा कि किसी भी हाल में इनमें से एक सीट पर उनका कब्जा बरकरार रहे। यही विपक्षी एकता की कसौटी होगी।

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