पिछले वर्ष का अंत और नए साल के पहले दिन सूरज का उगना जम्मू कश्मीर के पुलवामा ट्रेनिंग कैंप के लेथपोरा इलाके में स्थित केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल के कमाण्ड़ो ट्रेनिंग सेन्टर पर फिदायीन हमले की दुःखद घटना से हुआ है। इस हमले में पांच जवान शहीद हो गये।

36,000 रुपये की कटौती के साथ गूगल Pixel XL की कीमत हुई अब ये…

ऐसी स्थिति में क्या नागरिक उल्लास पूर्वक व उमंग के साथ नये वर्ष की खुशियाँ मना सकते हैं? यह ठीक वैसी ही स्थिति हैं, जब किसी नागरिक के घर में दीपावली पर किसी सदस्य का स्वर्गवास हो जाये। पाँच रक्षकों की शहादत की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। तब देश के मीडिया खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया ने क्षणिक ब्रेकिंग न्यूज देकर अपने दायित्व की इतिश्री समझ ली। मध्य रात्रि तक बहादुर सैनिकों का बलिदान नये वर्ष के संगीतमय नृत्य के शोर शराबे में शराबे में डूब गया। यह निश्चित रूप से हमारे अकिंचन मन को दुखित कर देने वाली स्थिति है।

करीब 43 महीनों की नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश की आंतरिक स्थिति में कई उपलब्धियाँ जोड़ी हैं। विदेशो में भी भारत को पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थान दिलाया है। वैसा शायद आयरन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के जमाने में भी नहीं मिल पाया था। नरेन्द्र मोदी के पूर्व इंदिरा गांधी ने वह अदम्य अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक साहस दिखा कर पाकिस्तान के दो टुकड़े कर नया राष्ट्र बांग्लादेश बनवा दिया था। इसके बावजूद उस समय विश्व के दोनों श्रेष्ठ राष्ट्र (अमेरिका व रूस) के साथ हमारे एक साथ दोस्ताना संबंध नहीं बन सके थे।

रूस ने तो बांग्लादेश के युद्ध में पूर्णतः भारत का साथ दिया था जबकि अमेरिका ने (भारत के) विरोध स्वरूप पाकिस्तान के समर्थन में हिन्द महासागर में अपना सातवाँ बेड़ा ही भेज दिया था। आज पीएम नरेन्द्र मोदी ने न सिर्फ रूस व अमेरिका से, बल्कि जर्मनी, इंग्लैड़, फ्रांस इत्यादि बड़े यूरोपियन देशों तथा अरब देश व इज़राइल जैसे दो विपरीत ध्रुवों के साथ भी एक साथ दोस्ती के कदम बढ़ाए हैं।

इससे पाकिस्तान व चीन जैसी ताकतों के विरूद्ध अपने देश के हितार्थ राजनयिक संबंध मजबूत हुए हैं। इसी कारण विश्व के राजनीतिक पटल पर सबसे मजबूत अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बगल में खड़े दिख कर भी मोदी के नेतृत्व में भारत ने देश हित में (यरूशलम को राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले के मामले में) संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका के विरोध में मत दिया। ऐसा कर भारत ने अपनी पूर्व प्रतिष्ठत निर्गुट विदेश नीति को बनाए रखा है।

आज भाजपा (एनडीए) को अटल जी की तुलना में भी श्रेष्ठतर दो तिहाई बहुमत प्राप्त है। वहीं मुख्य विपक्षी दल देश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार लोकसभा में तीन अंको के आकडे़ से घटकर 50 से भी कम पर सिमट गई। यह सब कहने का मतलब यही है कि आज देश का राजनीतिक नेतृत्व सबसे मजबूत स्थिति में हैं। उसने देश के आंतरिक विकास एवं बेहतरी के लिए जीएसटी, नोटबंदी जैसे कई कड़क फैसले लिये हैं।

इसके विपरीत देश की सीमा रक्षा व सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिदंगी की रक्षा हमारे लिए आज भी चुनौती है। वर्ष 2017 का पुनरावलोकन करें तो प्रथम सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से आज तक पायेगें कि न पिछले वर्ष की तुलना में पाकिस्तान एवं उसके द्वारा निर्देशित आंतकियों द्वारा सीमाओं पर व देश के अंदर आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ है। ऐसे में हमारे सैनिकों की शहादत में भी बढ़ोतरी हुई है। यद्यपि दुश्मन देश के मारे जाने वाले सैनिको की संख्या में भी वृद्धि हुई है, लेकिन इससे आतंक का खात्मा नहीं हो सका है।

सरकार या मीडिया का यह कथन समझ से परे है कि बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा। हम कहते हैं कि शहादत का बदला अवश्य लिया जायेगा। सवाल है कि यह कब, कैसे व किस सीमा तक? वैसे तो कुछ समय पूर्व ही हमारे एक मेजर व तीन सिपाही शहीद हो गये थे तब भी चार दुश्मनों को मारकर बदला लेने की बात हुई। क्या हमारे एक बहादुर की शहादत की तुलना दुश्मन देश के एक- दो सिपाही को मारने से की जा सकती है? मीडिया अति उत्साह में गंभीर घटनाओं को भी इतने उथले रूप में क्यो लेता है? क्या उसे अपनी जिम्मेदारी का अंदाजा व अहसास नहीं है? सरकार और सेना को भी सोचना होगा कि आत्मरक्षा के लिये आक्रमण ही सर्वोच्च सुरक्षा मानी जाती है।

अरब, इज़राइल या अफगानिस्तान का मामला लें, जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका न जाने कितने देश हैं, जिन्होनें अपने अपनी सुरक्षा व सम्मान की खातिर दुश्मन देश के भीतर घुसकर आतंकवादी व दुश्मन सेना को नेस्तनाबूद कर दिया। किसी भी देश ने दूसरे देश के भीतर घुसने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ से पूर्व स्वीकृति नहीं ली या घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने ऐसे देशों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया।

इजराइल में ब्रह्मास्त्र की शूटिंग के दौरान मस्ती करते दिखें रणबीर आलिया

तो क्या अब समय नहीं आ गया है, जब हमारा राजनीतिक नेतृत्व भी देश की सम्प्रभुता, सुरक्षा व एकता के लिए नई नीति बनाये ? समय रहते (जो कि गुजरता जा रहा हैं) देश के आत्म सम्मान, गौरव, व सीमा सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को भी सबक सिखाना निहायत जरूरी है ताकि उस पार से होने वाली आतंकी गतिविधियाँ पूर्णतः नष्ट हो जायं। देश की और इस जननी भूमि की व सीमा का सम्मान करने वाला दल भाजपा भी यदि इस कार्य को नहीं कर पाएगा तो अन्य किसी दल (जो तुष्टीकरण की नीति पर ज्यादा विश्वास करते हैं) से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती।

Advertisement
Nokia
SHARE

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here