जम्मू शहर के रिहायशी इलाके में सुंजवान स्थित थलसेना के शिविर पर आतंकियों ने हमला किया। इसके पहले भी सेना के शिविरों में हमले हो चुके हैं। जिस तरह से ये हमले हो रहे हैं और जिस तरह से संघर्ष विराम का लगातार उल्लंघन हो रहा है, उससे साफ है कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद पर अभी तक प्रभावी अंकुश नहीं लग सका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक फलक पर भले ही कूटनीति के रंग दिखाने में सफल हो गए हैं, लेकिन एशिया महादेश में आतंकवाद के संदर्भ में और विशेष रूप से पाकिस्तान को सबक सिखाने की दृष्टि से उनकी रणनीति ज्यादा सफल नहीं हो सकी है।

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सीमा पार से सैन्य ठिकानों पर आतंकी हमलों की सूची लंबी होती जा रही है। हंदवाड़ा, शोपियां, पुलवामा, तंगधार, कुपवाड़ा, पंपोर, श्रीनगर, सोपोर, राजौरी, बड़गाम, उरी और पठानकोट में हमलों में हमने अपने सैनिकों के रूप में बड़ी कीमत चुकाई है। रिश्‍तों में सुधार की भारत की ओर से हुई कई कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह शांति कायम रखने के प्रति कतई गंभीर नहीं हैं। पाकिस्तानी हमलावर 30 जुलाई 2011 को दो जवानों के सिर भी काट ले गये थे। आठ जनवरी 2013 को पाक सैनिकों ने पूंछ इलाके के ही मेंढर क्षेत्र में करीब आधा किलोमीटर भीतर घुसकर दो जवानों की हत्या कर दी थी, फिर शहीद सैनिक हेमराज का सिर काट ले गए। 22 नवंबर 2016 को मांछिल में हुई मुठभेड़ में तीन जवान शहीद हुए। इनमें से प्रभु सिंह का सिर काट लिया गया। 28 अक्टूबर 2016 को शहीद जवान मंदीप सिंह के शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया। कारगिल युद्ध के समय ऐसी ही हिंसक बर्बरता कैप्टन सौरभ कालिया के साथ बरती गयी थी। अंतरराष्‍ट्रीय कानून के मुताबिक युद्ध के समय भी ऐसी बर्बरता करने की इजाजत नहीं है। ये वारदातें युद्ध अपराध की श्रेणी में आती हैं। दुर्भाग्यवश भारत सरकार मामूली विरोध जताकर चुप बैठ जाती रही है। भारत की यह सहिष्‍णुता पाकिस्तानी सैनिकों की क्रूर सोच को प्रोत्साहित करती है। इसलिए अब समय आ गया है कि पाकिस्तान संबंधी नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन किया जाए। साथ ही कश्‍मीर के परिप्रेक्ष्य में भी नई और ठोस रणनीति अमल में लाई जाए।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के दावे तो कई किये, लेकिन अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे। उन्होंने सिंधू जल संधि पर विराम लगाने की पहल जरूर की, लेकिन कूटनीति के स्तर पर कोई अमल नहीं किया। यदि सिंधु नदी से पाक को मिलने वाला पानी बंद कर दिया जाए तो पाकिस्तान में पेयजल संकट होने के साथ ही वहां की लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी भी मिलना बंद हो जायेगा। लेकिन भारत यह कूटनीतिक जवाब देने की मानसिक तैयारी नहीं कर पा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया हुआ है। इससे दुनिया से व्यापार के मामले में उसकी मजबूत साख बनी हुई है। भारत इस दर्जे को खत्म कर दे तो पाकिस्तान की अंतरराष्‍ट्रीय साख पर बट्टा लगेगा। राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के स्तर हुई बातचीत में स्पष्ट किया जा चुका है कि आतंकवाद और शांतिवार्ता एक साथ नहीं चल सकते, इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंधन कर सीमा पर तैनात जवानों से लेकर मानव बस्तियों में स्थित सैन्य शिविरों पर आतंकियों के जरिए हमले बोलने में लगा है।

युद्धविराम उल्लंघन की घटनाएं 2017 में जितनी मर्तबा हुई हैं, उतनी बीते सात सालों में नहीं हुई। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इनकी संख्या डेढ़ गुनी हो गई। 2016 में जहां अंतरराष्‍ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर 449 बार युद्धविराम का उल्लंघन हुआ, वहीं 2017 में 778 बार हुआ। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए दोनों देशों के बीच युद्धविराम संधि नये सिरे से लागू हुई थी। इसके बावजूद अहालात भड़काऊ और चिंताजनक ही बने रहे।
दरअसल पाकिस्तान के जो निर्वाचित प्रतिनिधि इस्लामाबाद की सत्ता पर काबिज हैं, उनका अपने ही देश की सेना पर कोई नियंत्रण नहीं है। हुकूमत पर सेना और आईएसआई का इतना जबरदस्त प्रभाव है कि वह हमेशा भारत के खिलाफ सत्ता को उकसाते रहने का काम करती है। यही वजह है कि सेना की मदद से पाकिस्तान भाड़े के सैनिकों को भारत में घुसपैठ कराकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की भूमिका रचता है। सच ये भी है कि सत्ता-सूत्र संभालने को लेकर पाकिस्तानी शासन-प्रशासन और सेना की बीच कभी भी संबंध मधुर नहीं। जब-जब ये संबंध ज्यादा बिगड़ते हैं, तब-तब पाकिस्तान का भारत के खिलाफ क्रूरतम बर्ताव सामने आता है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमर वहीद बाजवा बिना किसी हिचक के सीमा के निकट हाजी पीर सेक्टर तक आकर आतंककियों को भड़का जाते हैं। यही नहीं बाजवा ने कश्मीर में चल रहे अलगाववादी संघर्ष का भी खुलकर समर्थन किया था और कश्मीर में चल रही भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई को राज्य प्रायोजित आतंकवाद कहा था। इसके बाद भी हमारी ओर से कड़ा जवाब नहीं दिया गया।

पाक के इरादे भारत के प्रति नेक नहीं हैं, यह हकीकत सीमा पर घटी इस ताजा घटना ने तो साबित की ही है, इसी नजरिये से वह आर्थिक मोर्चे पर भी भारत से छद्म युद्ध लड़ रहा है। देश में नकली मुद्रा की आमद नोटबंदी के बाद भी जारी है। नकली नोटों की तस्करी कश्‍मीर, राजस्थान, नेपाल और दुबई के जरिये तथा समुद्री जहाजों से हो रही है। जाली मुद्रा के लेन-देन में सैंकड़ों लोग पकड़े जाते हैं, लेकिन कानून सख्ते होने की वजह से आसानी से जमानत पर छूट भी जाते हैं और फिर अपने पुराने धंधे में जुट जाते हैं। कहने का मतलब यही है कि पाकिस्तान हमारी मानवीयता दिखाने की प्रवृत्ति का पूरी तरह से फायदा उठा रहा है और हमें अस्थिर करने में लगा हुआ है।

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक कई मुस्लिम देशों की यात्रा कर चुके हैं। हर जगह उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा गया और उनकी बातों को गंभीरता के साथ सुना गया। उन्हें वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अहम् व्यक्ति माना गया। यह अच्छी बात है कि हमारे प्रधानमंत्री को इस योग्य माना जा रहा है, लेकिन इस तरह की किसी भी योग्यता का लाभ तब अधिक होगा जब वे अपनी कार्रवाई से पाकिस्तान को सबक सिखाकर उसे अलगाववादियों से बाज आने के लिए विवश कर दें। बहरहाल, भारत को यह मानकर चलना होगा कि अब उंगली टेढ़ी किये बिना घी निकलने वाला नहीं है और उसे सख्त कदम उठाना ही होगा।

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