ऋषिकेश। लोक व आस्था के महापर्व छठ पूजा पर लोग सूर्य की उपासना करते हैं। यह व्रत करने वालों को सहज ही धन-धान्य, यश, कीर्ति व संतान की प्राप्ति होती है। छठ पूजा की परंपरा महाभारत काल से ही चली आ रही है। आज के युग में जहां सभी त्योहारों पर आधुनिकता का असर दिखाई देता है, वहीं छठ पूजा आज भी पारंपरिक ढंग से पूरी आस्था व आध्यात्म के वातावरण में की जाती है।

छठ पूजा अभी तक बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग ही करते थे, लेकिन आज समय बीतने के साथ ही यह पर्व दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, उत्तराखंड समेत देश के अधिकांश बड़े शहरों में मनाया जाने लगा है। छठ पूजा में पहले दिन डूबते सूर्य व दूसरे दिन उगते सूर्य को अ‌र्घ्य अर्पित कर उनकी उपासना की जाती है।

मान्यता है कि सूर्यदेव और छठ मइया-भाई-बहन हैं। व्रत में सूर्य की उपासना से कई तरह के रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस पूजा में निर्जला व्रत रहकर किसी जलाशय या पोखरा अथवा नदी अथवा गंगा तट पर सूर्य की पूजा की जाती है। तरह-तरह के मेवाें व मिष्ठान के साथ गाय के दूध या पवित्र जल से सूर्य को अ‌र्घ्य अर्पित किया जाता है।

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