दिव्य कार्तिक माह की शुक्ल नवमी ति​थि आम बोलचाल में अक्षय नवमी का खास महत्व है। धर्म नगरी काशी में इस दिन का विशेष महत्व है।

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खास बात यह है कि सनातन धर्म में इसी दिन से द्वापर युग की शुरुआत मानी गयी है। इस दिन गंगा स्नान-दान और दर्शन-पूजन से अमोघ व अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस बार घनिष्ठा नक्षत्र में अक्षय नवमी का दुर्लभ योग रविवार को है।

जाने माने ज्योतिषविद आचार्य राजकिशोर पांडेय ने बताया कि कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आज मध्य रात्रि पश्चात 12:54 पर लगेगी जो 29 अक्टूबर को दिन में अपरान्ह 2:08 तक रहेगी। इस दिन आंवले के वृक्ष और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। अक्षय नवमी को आंवला नवमी, धात्री नवमी भी कहा जाता है। इसी दिन आंवले के वृक्ष की पूजा के साथ अहरा दगा भोजन बनाकर ब्राम्हण को खिलाया जाता है ।

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ज्योतिषाचार्य के मुताबिक नवमी तिथि पर ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान पूजन के पश्चात व्रत का संकल्प लें। पूरब की ओर होकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें। पूजन के पश्चात वृक्ष की परिक्रमा जरूर लगाएं। यदि आंवले का वृक्ष उपलब्ध न हो तो गमले में आंवले का पौधा लगाकर उसकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया जा सकता है।

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