नई दिल्ली। दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आआटपा) में राज्यसभा के तीन उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। आने वाले साल की 5 जनवरी नामांकन की आखिरी तारीख है लेकिन पार्टी अपने तीनों उम्मीदवारों का अंतिम फैसला नहीं कर पाई है।

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दिल्ली में राज्यसभा की तीन सीटें हैं। वर्तमान में कांग्रेस के जनार्दन द्विवेदी, कर्ण सिंह और परवेज हाशमी दिल्ली से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनका कार्यकाल अगले साल 27 जनवरी में खत्म होने वाला है। वहीं पार्टी सूत्रों के अनुसार उच्च सदन में जाने को लिए आआपा नेता डॉ. कुमार विश्वास, संजय सिंह, आशुतोष, स्वाति मालीवाल अपने पक्ष में माहौल तैयार करा रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री और आआपा संयोजक अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के साथ नए साल की छुट्टियां मनाने के लिए भारत के एक द्वीप पर चले गए हैं। स्पष्ट है कि राज्यसभा के लिए आआपा के तीनों उम्मीदवारों का फैसला अब केजरीवाल के छुट्टियों से लौटकर आने के बाद ही होगा।

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सूत्रा बताते हैं कि राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम फैसला राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में ही होगा। इस बीच चुनाव विश्लेषक और आआपा के पूर्व सदस्य योगेंद्र यादव ने एक नई संभावना जताकर माहौल को रुख बदल दिया है। योगेन्द्र यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल स्वयं भी राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में उतर सकते हैं। दूसरी तरफ आआपा के द्वारा डॉ. कुमार विश्वास को प्रत्याशी न बनाए जाने की स्थिति में बगावत भी होने की बातें कही जा रही हैं। तब संभव है कि आआपा द्वारा घोषित तीनों प्रत्याशी निर्विरोध न चुने जाएं और मतदान की स्थिति आ जाए।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की विधानसभा में राज्यसभा का प्रत्याशी बनने के लिए कम से कम सात विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। वर्तमान में भाजपा के पास मात्र चार विधायक हैं। चुनाव की स्थिति लाने के लिए कुमार विश्वास को ‘आआपा’ के तीन विधायकों का समर्थन जुटाना कठिन काम नहीं है। बिजवासन के विधायक देवेंद्र सहरावत की विश्वास के नजदीकियां जगजाहिर हैं। वहीं करावल नगर के विधायक कपिल मिश्रा भी विश्वास के साथ हैं। मटिया महल के विधायक आसिम अहमद खान और तिमारपुर के विधायक पंकज पुष्कर भी कुमार विश्वास के प्रस्तावक बन सकते हैं।
आआपा के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी चाहती थी कि संसद के उच्च सदन में कुछ पेशेवर लोगों को भेजा जाए या फिर ऐसे राजनीतिक चेहरे को भेजा जाए जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुखर विरोधी रहे हो। पार्टी ने इसी सिलसिले में आरबीआई पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायामूर्ति टी. एस. ठाकुर और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा से भी सम्पर्क साधा था। लेकिन, इन सबने आप के ऑफर को अस्वीकार कर दिया था। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल और उनकी पार्टी के वे तीन प्रमुख चेहरे कौन से होंगे।

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