लखनऊ। राज्यसभा के लिए हो रहे उपचुनाव में उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में बुधवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व डॉ दिनेश शर्मा तथा पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद रहे। 

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नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का आभार व्यक्त किया। हरदीप सिंह पुरी सभी नेताओं के साथ करीब 11 बजे भाजपा के प्रदेश कार्यालय से पैदल ही विधान भवन पहुंचे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य लोगों की मौजूदगी में अपना पर्चा दाखिल किया।

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उत्तर प्रदेश की एक, दिल्ली की तीन और सिक्किम के एक राज्यसभा सीट के लिए इस समय उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है। राज्यसभा की इन पांचों सीटों के लिए 16 जनवरी को मतदान होना है। इसके लिए नामांकन की अंतिम तिथि पांच जनवरी है। छह जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि नाम वापस लेने की आखिरी तारीख आठ जनवरी है। 16 जनवरी को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे मतगणना होगी।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की यह सीट गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है। इस सीट का कार्यकाल 25 नवम्बर 2020 तक है। भाजपा ने इस सीट के लिए हरदीप सिंह पुरी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। उप्र में यह चुनाव तो महज औपचारिकता ही है, क्योंकि विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से भाजपा प्रत्याशी की जीत यहां सुनिश्चित है। हरदीप सिंह पुरी यहां से निर्विरोध भी चुने जा सकते हैं।

वैसे अप्रैल में यहां से राज्यसभा की 10 सीटें और खाली हो रही हैं। हालांकि, इनमें से एक सीट बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहले ही इस्तीफा देकर रिक्त कर दी है। मायावती के अलावा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गये सपा के किरनमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश चंद्र अग्रवाल, जया बच्चन, चौधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी तथा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, भाजपा के विनय कटियार और बसपा के मुनकाद अली का कार्यकाल दो अप्रैल को पूरा हो जाएगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग इन दस सीटों के लिए भी चुनाव करवाएगा। राज्य सभा के इस चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मी शीघ्र ही बढ़ने वाली है। विधान सभा में इस समय भाजपा के पास सहयोगी दलों को मिलाकर 325 की संख्या है। वहीं विपक्षियों में सपा के 47, बसपा के 19 और कांग्रेस के मात्र सात विधायक हैं। राज्य सभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी दल को करीब 40 विधायकों के मतों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अधिकतर सदस्य भाजपा के ही जीतेंगे। सपा भी अपना एक सांसद राज्य सभा में भेज सकती है।

चूंकि भाजपा के कम से कम आठ सांसद राज्य सभा के लिए चुने जाने हैं। ऐसे में इस दल को अपने उम्मीदवार तय करने में काफी मंथन करना पड़ेगा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जो इस समय किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और खाली बैठे हैं, उन सब की निगाहें राज्य सभा के इस चुनाव पर लगी हुई है। 

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