भाजपा आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और महामंत्री सिद्धार्थन के कामकाज से नाखुश है और जल्दी ही इन्हें बदला जा सकता है। करीब एक साल के कामकाज में मनोज तिवारी के पास कुछ भी ठोस नहीं है और सूत्रों की मानें तो भाजपा फिर से पुराने चेहरों डॉ. हर्षवर्धन या विजय गोयल को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है। गौरतलब है कि कुछ सर्वे रिपोर्ट मनोज तिवारी को 2019 में भाजपा की नैय्या पार लगाने के उपयुक्त नहीं समझ रहे।

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दिसंबर 2016 में जब भोजपुरी गायक से सांसद बने मनोज तिवारी को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गयी थी तो माना गया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में मौजूद पुरबिया वोटरों में इससे उत्साह का माहौल बनेगा और गरीब व निचले तबके के वोटर भी पार्टी से जुड़ेंगे। हालांकि मनोज तिवारी अपनी पूरी कोशिश में रहे कि लोगों से सीधा संवाद कैसे कायम किया जाये, लेकिन हर बार उनका अहं और स्टारडम बीच में आ जाता है। वे अभी भी खुद को फिल्मस्टार मानना नहीं भूल रहे और जन सरोकारों से जुड़ने की बजाय अपने अभियानों के प्रचार-प्रसार में ज्यादा व्यस्त रह रहे हैं। इसके अलावा उनके पास समझ-बूझ की भी कमी है और वे अभी तक अपने किसी भी अभियान में समाज के किसी भी वर्ग को जोड़ नहीं पाये हैं।

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दूसरी तरफ डॉ. हर्षवर्धन को लोकप्रिय और दिल्ली की समझ रखने वाला नेता माना जा रहा है। उनकी छवि बेदाग भी है और वे अपने अभियानों में जन-साधारण को जोड़ने में माहिर भी हैं। खास बात ये है कि वे पुरबिया वर्ग में भी खासे लोकप्रिय हैं। दिल्ली से आने वाले विजय गोयल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिये पार्टी आलाकमान की दूसरी पसंद माने जा रहे हैं। हालांकि उनकी छवि कुछ खास नहीं है, लेकिन उन्हें उम्दा रणनीतिकार माना जाता है और समय आने पर उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गज विरोधियों को धूल चटायी है।

सूत्रों की मानें तो मनोज तिवारी को सरकार या संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देकर सम्मानपूर्वक कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी हो चुकी है, लेकिन उनके बदले कौन आयेगा इस पर मंथन चल रहा है।

 

 

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