भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। विपक्ष ने इस प्रेस कांफ्रेंस में उठाए गए मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद कमलनाथ ने भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा है और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के तौर- तरीकों पर असंतोष जताया है। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखी अपनी चिट्ठी भी सार्वजिनक की है। इस मामले को लेकर एक तरफ जहां पीएम मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से इस मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने मोदी सरकार पर राजनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं।

इसी कड़ी में मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने ट्विटर के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है- SC के 4 मौजूदा जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस, देश की न्याय व्यवस्था के लिये गंभीर संकट, सरकार को पल्ला झाड़ने की बजाय, उठाये गये मुद्दे “न्यायपालिका की स्वतंत्रता, आत्मा बेचने की बात, क्या स्वीकार नहीं, किस ख़ास मुद्दे को लेकर मतभेद” पर स्थिति स्पष्ट करना चाहिये।

न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर से मुलाकात पर डी राजा ने दी सफाई

मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली पर प्रश्न उठाने वाले न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर से मुलाकात करने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने अपनी सफाई में कहा है कि उनकी मुलाकात राजनीतिक नहीं थी।

डी राजा का कहना है कि वह न्यायमूर्ति चेलमेश्वर से पहले से ही परिचित रहे हैं। उन्हें जब पता चला कि उनके साथ कुछ न्यायाधीशों ने एक बड़ा कदम उठाया है तो वह उनसे मिलने गए। इसे राजनीतिक रंग दिया जाना ठीक नहीं है। यह सभी के लिए चिंता का विषय है और देश के भविष्य और लोकतंत्र का विषय है।

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