पटना। विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि मधुमेह एक ऐसा साइलेंट रोग है जिसके बारे में पता नहीं चलता ।

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इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) कार्यालय में आयोजित एक शिविर को संबोधित करते हुए विनोद नारायण झा ने मंगलवार को शिविर के आयोजन को एक अच्छी पहल बताते हुए यहाँ कहा कि इस रोग के बारे में यूं हीं पता नहीं लग पाता । उन्होंने कहा कि हम जब डाक्टर के पास जाते हैं तो इस रोग के बारे में जानकारी मिलती है । मंत्री ने कहा कि जागरूकता के अभाव के कारण बहुत सारे लोग इस रोग के बारे में नहीं जानते ।

पार्टी के चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डा0 मनोज कुमार ने कहा कि आज भारत पूरे विश्व में मधुमेह रोगी की संख्या में चीन से भी आगे है । उन्होंने कहा कि शहरी जीवन जीने का आदि होना, लोगों में शारीरिक क्षमता का भरपूर प्रयोग न करना, जंक फूड और पाश्चात्य भोजन के प्रति लोगों का झुकाव और मोटापे की समस्या के कारण यह रोग देश में तेज़ी से फैकल चुका है 1 स्वास्थ्य शिक्षा की घोर कमी के कारण यह बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आती है ।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे भारत में लगभग सवा 6 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं जिसमें आधे ऐसे लोग हैं जिन्हें पता भी नहीं चलता और वे प्री-मधुमेह रोगी हैं ।

डा0 आनंद शंकर ने महिलाओं में बढ़ते मधुमेह पर चिंता वयक्त करते हुए कहा कि इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ‘मधुमेह एवं औरत’ का नारा दिया है और गर्भाधारण के दौरान सुरक्षित बच्चे रखने से जोड़ दिया गया है । डा0 आनंद ने कहा कि आज भारत में हरेक 10 में एक महिला मधुमेह रोग से पीड़ित है ।

इस अवसर पर 150 लोगों के मधुमेह जांच की गई तथा उन्हें इससे बचाव के बारे में बताया गया । सरकार पर हमला बोलते हुए उपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी समान काम के लिए समान मजदूरी देने की व्यवस्था पर न तो सरकारें कायम हैं न ही निजी क्षेत्र की कंपनियां। जितनी सरकारी परियोजनाएं चल रही हैं उनमें सिर्फ व्यावसायिक हित को ध्यान में रखा जाता है। इसमें मानवीय पहलू का कोई स्थान नहीं होता। यह कभी भी देशहित में नहीं है।

जीएसटी नीति की निंदा करते हुए उपाध्याय ने कहा कि इसके तहत सरकार ने सभी उपकरों (सेस) को हटा दिया। लेकिन इससे बीड़ी मजदूर के हित प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही सरकार ने पूर्व के मजदूर कल्याणकारी बोर्ड को खत्म कर दिया, इससे भी मजदूरों के हित प्रभावित हो रहे हैं। 7वें वेतन आयोग के सिफारिशों की चर्चा करते हुए उपाध्याय ने कहा कि सरकार ने अभी तक इसकी विसंगति को दूर नहीं किया है।

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17 नवंबर को प्रस्तावित मार्च पर उपाध्याय ने कहा कि अपनी मांगों के चार्टर के साथ भारतीय मजदूर संघ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेगा। संघ की अगली कार्रवाई सरकार के रुख पर निर्भर करेगी। संघ की मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लंबित मांगों को पूरा करना, सभी क्षेत्र में समान काम के लिए समान वेतन का भुगतान करना, ठेका प्रथा को समाप्त करना, बीड़ी मजदूर व निर्माण कार्य में संलग्न मजदूरों के लिए कल्याण को जारी रखना, मजदूरों को चिकित्सा सुविधा व पेंशन का प्रावधान करने की मांग शामिल होगा। पत्रकार सम्मेलन के दौरान उपाध्याय के अलावा दिल्ली के महासचिव बीएस भाटी व एनपी सिंह भी मौजूद थे।

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