चित्तौडग़ढ़। हरिद्वार में पितरों के मोक्ष के लिए अस्थियों का विसर्जन् होता है। वहां हर की पौड़ी पर हर शाम गंगा की आरती होती है। इसी तर्ज पर मेवाड़ के हरिद्वार के नाम से पहचान रखने वाले चित्तौडग़ढ़ जिले के मातृकुण्डिया तीर्थ पर भी अब हर शाम बनास नदी के घाट पर आरती होगी। दो दिन से इसकी शुरूआत करते हुए धार्मिक आस्था वाले लोगों को जोड़ कर इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। धर्म प्रेमियों ने मातृकुंडिया तीर्थ धाम के मुख्य शिव घाट पर आरती करने का बीड़ा उठाते हुए नई पहल की है।

चित्तौडग़ढ़ जिले में राशमी उपखंड क्षेत्र स्थित मातृकुण्डिया उदयपुर संभाग ही नहीं पूरे प्रदेश तथा आस-पास के राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यहां के घाट पर स्नान को हरिद्वार जितना ही महत्व दिया जाता है। पूर्णिमा सहित विभिन्न मौकों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। आस्था का केन्द्र होने से यहां अस्थियों का विसर्जन भी होता है तो श्रद्धालु पिंडदान भी करते हैं। कई श्रद्धालु ऐसे होते हैं जो हरिद्वार नहीं जा पाते, वे अस्थियों का विसर्जन मातृकुण्डिया में करते हैं। विशेष तौर पर मेवाड़, मालवा, हाड़ौती के श्रद्धालु आते हैं। यहां भगवान शिव का पुराना मंदिर है।

यहां क्षेत्रवासियों ने नई शुरूआत आरती के रूप में की है। यहां शिव घाट पर पंडित गोपाल शर्मा की अगुवाई में बनास की भव्य पूजा अर्चना की जा रही है। मातृकुंडिया को हरिद्वार के समक्ष मान्यता मिली हुई है, जहां पाप से मुक्ति के लिए श्रद्धालु स्नान भी करते हैं। साल में यहां दो मुख्य स्नान वैशाखी पूर्णिमा व कार्तिक पूर्णिमा का है।

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