छपरा। नये साल का मुबारक बाद देने के लिए तरह- तरह के ग्रीटिंग्स कार्ड उपलब्ध हैं | यह बात बहुत पुरानी नहीं हुई, फिर भी सोशल मिडिया ग्रीटिंग्स कार्ड के मामले में बहुत आगे है। पहले बहुत सारी बाल पत्रिकाओं में कार्ड बनाने के लिए सिखाया जाता था। किसी- किसी की कार्ड पर संदेश लिखने की शौक होती थी। घरों में बच्चे रंग-बिरंगे कागज पर पेंटिंग कर अपना ग्रीटिंग कार्ड बनाते थे। इसके लिए कई दिन पहले से तैयारी होती थी। लोग रंगीन स्याही से इन कार्डो पर शायरी, कविता और दिल को छू लेने वाले संदेश लिखकर नये साल की एक दूसरे को बधाई देते थे।एक दौर वो भी था, जब नए साल की शुभकामना ग्रीटिंग कार्ड के बिना अधूरी सी लगती थी।

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कई दिन पहले से कार्ड की बिक्री होने लगती थी। अपने मित्रों व चाहने वाले को लोग डाक से भी ग्रीटिंग कार्ड भेजते थे । कई लोग खुद भी कार्ड बनाते थे। लेकिन समय के साथ अब बहुत कुछ बदल चुका है । सोशल मीडिया और स्मार्टफोन ने इस प्रचलन को काफी हद तक कम कर दिया है। बाजार में का‌र्ड्स की बिक्री तो, हो रही है, मगर वह रौनक नहीं है। वहीं नए साल के दस्तक देते ही बधाई और शुभकामना देने का दौर शुरू हो जाता है। कार्ड बधाई देने का सबसे प्रचलित और प्रभावशाली माध्यम रहे हैं।हमेशा की तरह इस बार भी दुकानों पर नए साल के कार्ड सज गए हैं.रंग-बिरंगे। लेकिन वह बात देखने व चहल – पहल नहीं है। कार्ड में बेहतरीन लिखावट, मोहब्बत और अपनत्व के संदेश लिखे , दिलकश डिजाइनों में है । लोग खरीद भी रहे हैं। सोशल मीडिया ने असर तो, जरूर डाला है, लेकिन यह बाजार से दूर नहीं हुए हैं।

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दूकान में कार्ड के एक से बढ़कर एक खूबसूरत और मनमोहक डिजाइन उपलब्ध हैं।कुछ ऐसा कि गुस्सा हो तब भी कार्ड देखते ही देने वाले से प्यार हो जाए। हाथ से हाथ मिलाते, अंगूठी पहनाते, दिलों का आदान-प्रदान करते आदि कई आकर्षक पेंटिंग भी उपलब्ध है। मोहब्बत का संदेश ले जाते कबूतर, गुलाब की पंखुड़ियों के बीच मिल रहे दो दिल, ताजमहल आदि गुलाब तो कॉमन है। कार्डो पर संदेश और संबोधन इतने प्यार में डूबे हुए लिखे हैं कि पहली नजर में ही दिल को छू जाते हैं । स्वीट हार्ट, लव, माई लव, माई लाइफ आदि।संदेश में प्यार भरी कविताओं के अंश और पंक्तिया हैं। कुछ बानगी देखिए.. यह कार्ड नहीं मेरे दिल की भावना है । इस कार्ड की तरह हमेशा खिली रहो । इन गुलाबों की तरह मुस्कुराते रहो । क्षेत्र की दुकानों पर हर रेंज के कार्ड बिक रहे हैं । बच्चों के लिए भी 10-20 रुपये तक के कार्ड बिक रहे हैं। वहीं बड़ों के लिए कार्ड रुपये से लेकर 400 -500 रुपये तक के हैं।डिजाइन और साइज के अनुसार कीमतें हैं।

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दुकानदारों का कहना है कि 50 से 100 रुपये तक के कार्ड सबसे अधिक बिक रहे हैं । लेकिन पहले जिताना बिकता था , अब उतना नही बिक पाता है।सोशल मीडिया का असर पड़ा हुआ है । कार्ड की दुकानदारी पर सबसे अधिक असर व्हाट्सएप और फेसबुक ने डाला है । आकर्षक कार्ड की इमेज और एक से बढ़कर एक संदेश भेजने का आसान जरिया बन गया है। मेहनत भी कुछ नहीं । बस व्हाट्सऐप से फारवर्ड कर देना है । पैसे भी नहीं लगने है । एक पल में दूरी खत्म । फेसबुक व ट्विटर से भी एक साथ सारे मित्रों को बधाई देने का काम हो जाता है। कुछ न हुआ तो, एसएमएस तो है ही । इन माध्यमों का बड़ा फायदा यह हुआ कि समय पर न पहुंचने, खो जाने और डाक खर्च की परेशानी एक साथ खत्म हो गई। संदेश लिखने के लिए भी बहुत सोचने की जरूरत नहीं पड़ती किसी का भी संदेश खास लगा तो बस उसे फारवर्ड कर दीजिए आकर्षक वीडियो भी भेजे जा रहे हैं।

कार्ड की बिक्री में कमी आई है, लेकिन समाप्त नहीं हुआ।कार्ड के शौकीन हमेशा बने रहेंगे।अधिकांश ग्राहक युवा हैं।वे अपनी मित्रता के लिए कार्ड खरीद रहे हैं।

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