नई दिल्ली। केंद्रीय शिपिंग, सड़क परिवहन राजमार्ग जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को असम में शिपिंग मंत्रफ्लेगशिप सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत ब्रह्मपुत्र नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग (एन डब्ल्यू)-2 के माध्यम से पहले सीमेन्ट कार्गो परिवहन का उद्घाटन करेंगे। साथ ही असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में माजुली द्वीप के तट संरक्षण कार्य की आधारशिला भी रखेंगे।

रिलायंस जिओ खरीदेगा अनिल अंबानी के आर-कॉम की परिसंपत्तियां

देश में आर्थिक रूप से मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन को बढ़ावा देने के भारत सरकार के निरंतर प्रयासों के रूप में मील का पत्थर के प्रतीक स्वरूप 200-200 मीट्रिक टन क्षमता के दो माल ढुलाई पोत कुल 400 टन सीमेंट भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के पण्डु बंदरगाह से 255 किलोमीटर की दूरी तय कर ढुबरी ले जाऐंगे। एन डब्ल्यू-2 के माध्यम से पण्डु से ढुबरी तक कार्गो परिवहन से प्रतिचक्र सड़क परिवहन के 1,50,000 टन किलोमीटर की और माल की लागत कम करने में 300 किलोमीटर सड़क यात्रा की बचत होगी। यह ध्यान देने योग्य है कि एक हॉर्स पावर द्वारा सड़क से 150 किलोग्राम और रेल से 500 किलोग्राम ढुलाई हो सकती है जबकि जल मार्ग से 4000 किलोग्राम माल ढ़ोया जा सकता है। 1 लीटर ईंधन से सड़क से 24 टन प्रति किलोमीटर, रेल से 85 टन किलोमीटर तथा जलमार्ग से 105 टन प्रति किलोमाटर माल ढ़ोया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सड़क और रेल की तुलना में अंतर्देशीय जल परिवहन (आई डब्ल्यू टी) के लिए जमीन की भी न्यूनतम आवश्यकता होती है।

आईडब्ल्यूएआई पंडु से ढुबरी/हत्ससिंमीरी तक जलमार्ग परिवहन शुल्क के रूप में केवल 318 रूपये प्रति टन के हिसाब से शुल्क लेगा। इससे उद्यमियों और माल परिवहन ऑपरेटर को प्रोत्साहन मिलेगा और वे लागत प्रभावी तथा पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन को अपनाएंगे। इससे सड़कों पर लगने वाला जाम भी कम हो जाएगा। आईएडब्ल्यूएआई बड़ी सीमेंट फर्मों जैसे डालमिया, स्टार और अमृत के साथ निरंतर संपर्क में है और वे जलमार्ग से कार्गो परिवहन में रूचि ले रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि अन्य कार्गो मालिक भी जलमार्ग से माल परिवहन को अपनाएं। इससे माल ढुलाई की लागत में काफी कमी आएगी और अधिक व्यवसाय एवं रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे।

शिपिंग मंत्रालय ने कई प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें उत्तर पूर्व क्षेत्र को कोलकाता, हल्दिया, मोंगल और चिटगांव बंदरगाहों से जोड़ना; उत्तर पूर्व क्षेत्र में श्रेष्ठ माल भेजना; नदी किनारों पर रोल ऑन-रोल ऑफ (माल लादना उतारना) सेवाएं स्थापित करना; सशस्त्र बलों के लिए आवागमन की सुविधा प्रदान करना प्रमुख हैं।

वाणिज्यिक नेविगेशन के लिए ब्रह्मपुत्र नदी (एनडब्ल्यू 2) पर विकास के अंर्तगत पंडु बंदरगाह का विकास किया जाएगा, जो भौगोलिक स्थिति के कारण एनडब्ल्यू 2 पर प्रमुख टर्मिनलों में से एक है। वर्ष भर कार्गो को लादने और उतारने के लिए दोनों उच्च और निम्न स्तर की आर सी सी जेटी का निर्माण किया गया है। इस बंदरगाह को बहु-मॉडल वाली और आधुनिक अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया। इसमें कार्गो रख-रखाव सुविधाएं, पारगमन शेड और उपयुक्त खुला स्थान/हार्ड स्टेंड की सुविधाएं प्रदान की गई है।

एन डब्ल्यू-2 के संपूर्ण मार्ग पर दिन में नेविगेशन चिह्न लगाए हैं। रात्रि नेविगेशन सुविधाओं के लिए बंग्लादेश सीमा और सिलघाट (440 किलोमीटर) के बीच सौर ऊर्जा चालित प्रकाश व्यवस्था प्रदान की गई है।

पोतों के सुरक्षित नेविगेशन के लिए चार स्थानों अर्थात ढुबरी, जोगीघोपा बिश्वनाथघाट और डिब्रूगढ पर इलेक्ट्रोनिक चार्टों सहित डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशिंनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) केंद्र स्थापित किए गए हैं। 12 महत्वपूर्ण स्थानों अर्थात हत्सिंसिमरी, ढुबरी, जोगीघोपा, पंडु, तेजपुर, सिलघाट, बिश्वनाथघाट, नेमाटी, सेन्गजन, बोगीबिल, डिब्रूगढ़ / ओकलैंड और ओरिंमघाट पर तैरती टर्मिनिल सुविधाएं प्रदान की गई है। स्थानों की आवश्यकता के अनुसार उनकी संख्या में और वृद्धि की जाएगी।

पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में आईडब्ल्यूटी को बढ़ावा देने के लिए पिछले तीन वर्षों में नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत, 2016 में अधिसूचित 106 नए राष्ट्रीय जलमार्गों में से 19 जलमार्ग एनईआर में हैं। इनमें से कुछ एन डब्ल्यू -16 (नदी बराक), एनडब्ल्यू -95 (नदी सुबनसिरी), एन डब्ल्यू -39 (नदी गणोल), एनडब्ल्यू -93 (नदी सिमसंग), एनडब्ल्यू -101 (नदी तिज़ू और जुंग्की), एनडब्ल्यू -31 (धनसिरी), एनडब्ल्यू -62 (नदी लोहित), एनडब्ल्यू -106 (नदी उमगोट), एनडब्ल्यू -18 (बेकी नदी) प्रमुख हैं।

जनवरी, 2017 में, माननीय केन्द्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय जलमार्ग16 के रूप में नदी के बराक के लखीपुर-भंगा खंड के विकास के लिए नींव रखी। करीमगंज और बदरपुर में स्थित टर्मिनलों के आधुनिकीकरण के लिए डीपीआर का कार्य चल रहा है। आईडब्ल्यूएआई ने अप्रैल 2017 में पंडू से डिब्रूगढ़ तक 485 किलोंमीटर दूरी तय कर आर ओ-आर ओ नावों में आठ सेना ट्रकों के परिवहन संचालन का सफल परीक्षण किया। मई 2017 में, आईडब्ल्यूएआई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विभाग (डीओईईआर) के साथ मिलकर मुख्य रूप से ब्रह्मपुत्र नदी पर कार्गो और यात्री परिवहन की क्षमता दिखाने के लिए रोड शो का आयोजन किया। सितंबर 2017 में, चूना पत्थर कार्गो को करीमगंज से बांग्लादेश में आशुगंज भेजा गया। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के रेगुलर ओवर-डायमेन्शनल-कंसाइनमेंट (ओडीसी) ट्रान्सफॉर्मर्स, जो रेल और सड़क द्वारा नहीं ले जाए जा सकते, ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू -2) में ले जाए जा रहे हैं। नदी पर्यटन भी ब्रह्मपुत्र नदी पर काफी लोकप्रिय है।

ऐसी होगी मारुति सुज़ुकी की नई स्विफ्ट

आईडब्ल्यूएआई ने पहले से ही दो ट्रकों की खरीद के लिए 8 ट्रक और 100 यात्रियों की वहन क्षमता और 12 ट्रकों और 100 यात्रियों की वहन क्षमता वाले दो आर ओ-आर ओ पोत की खरीद के लिए कार्रवाई पहले ही शुरू कर दी है। इसके अतिरिक्त आईडब्ल्यूएआई द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी में तैनात करने के लिए चार और आर ओ-आर ओ पोत खरीदने की प्रक्रिया जारी है।

 

Advertisement
Nokia
SHARE

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here