लखनऊ। सर्दी के दिनों में जरा सी लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है। ठंड के मौसम में बच्चों में न्यूमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों की सेहत को लेकर खासतौर से सावधानी बरतनी चाहिए। चिकित्सकों की मानें तो यदि इस दौरान बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया तो उनके स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है।

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आंकड़े बताते हैं कि विश्व में हर 20 सेकंड में एक बच्चे की मौत न्यूमोनिया से होती है। इस प्रकार दुनिया भर में 05 वर्ष से कम उम्र के करीब 14 लाख बच्चे न्यूमोनिया की वजह से अपनी जान गवां देते हैं। यह आंकड़ा एड्स,मलेरिया और टीबी से बच्चों की मौत के कुल आंकड़े से कहीं ज्यादा है।

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डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डा. ओमकार यादव ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि फेफड़ों में संक्रमण की बीमारी न्यूमोनिया दुनिया भर में बच्चों की मौत का मुख्य कारण है। जिस बच्चे को न्यूमोनिया होता है उसके एक या दोनों फेफड़ों में पस और तरल पदार्थ भर जाते हैं, जो फेफड़े को ऑक्सीजन ग्रहण करने में रुकावट पैदा करते हैं। जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है जो बच्चों के लिए घातक है।

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यह समस्या ठंड में बढ़ जाती है। डाक्टरों के मुताबिक लगातार जुकाम, कफ, कंपकंपी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत अगर समय रहते दूर न हो तो इसे केवल ठंड की बीमारी नहीं समझना चाहिए।

क्या है न्यूमोनिया

न्यूमोनिया, फेफड़ों में एक प्रकार का संक्रमण है, जिसमें रोगी को सांस लेने में परेशानी होती है। इससे फेफड़ों में दर्द व सूजन आ जाती है।

न्यूमोनिया के प्रकार 

कम्युनिटी एक्वायर्ड न्यूमोनिया और एक्वायर्ड न्यूमोनिया। कम्युनिटी एक्वायर्ड न्यूमोनिया ऐसा प्रकार है, जो घर में रहने पर भी रोगी को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। वहीं एक्वायर्ड न्यूमोनिया अस्पताल में भर्ती लोगों को ज्यादा होता है, जिसकी मुख्य वजह संक्रमण होता है।

संक्रमण के कारण होता है न्यूमोनिया 

बच्चों में न्यूमोनिया का मुख्य कारण वायरस का संक्रमण है। आमतौर पर नाक और गले में पाए जाने वाले वायरस और बैक्टीरिया सांस लेने पर फेफड़ों को संक्रमित कर सकते हैं। न्यूमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के संक्रमण से होता है। हवा में मौजूद किसी की खांसी या छींक से निकले रोगाणु के कारण भी बच्चों में न्यूमोनिया के होने की आशंका होती है।

क्या होते हैं लक्षण

1. बुखार, ठंडक महसूस होना, कंपकपाहट और खांसी।
2. श्वास की गति का तेज होना और घरघराहट सुनाई देना।
3. उलटी, सीने या पेट के निचले हिस्से में दर्द।
4. शिशु को दूध पीने में कठिनाई और बड़े बच्चों में भूख न लगने की समस्या।
5. कभी-कभी स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर बच्चे के होंठों और नाखूनों का रंग नीला पड़ जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

1. बच्चे को न्यूमोनिया के संक्रमण से बचाने के लिए आजकल बाजार में वैक्सीन भी उपलब्ध हैं, जिन्हें लगवाने से बच्चा इस बीमारी से बचा रहता है.
2. अगर आपके बच्चे को ऐसी समस्या हो तो आप प्रतिदिन सुबह और शाम उसके शरीर के तापमान की जांच करें।
3. जिन बच्चों को टीबी का इन्फेक्शन होता है, उन्हें भी न्यूमोनिया होने की आशंका अधिक होती है।
4. अगर घर में किसी को यह इन्फेक्शन हो उससे बच्चे को दूर रखें।
5. अगर बच्चे को छाती में दर्द की शिकायत रहती है तो सूती कपड़े पर प्रेस चला कर हलके गरम कपड़े से बच्चे की छाती की सिंकाई करें।

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